आज का पंचांग कैसे पढ़ें
हर सुबह लाखों घरों में पंचांग देखा जाता है. कोई शुभ मुहूर्त के लिए, कोई व्रत की तिथि के लिए, कोई बस यह जानने के लिए कि आज का दिन कैसा रहेगा.
लेकिन पंचांग में लिखी पांच पंक्तियों का असल में क्या मतलब है, यह बहुत कम लोग जानते हैं. यह लेख वही समझाता है.
पंचांग का अर्थ
"पंचांग" दो शब्दों से बना है, पंच यानी पांच और अंग यानी हिस्सा. यानी पांच अंगों वाली गणना.
ये पांच अंग हैं:
| अंग | क्या बताता है | किससे बनता है |
|---|---|---|
| तिथि | चंद्र दिवस | सूर्य और चंद्रमा के बीच का अंतर |
| वार | सप्ताह का दिन | सूर्योदय से सूर्योदय तक |
| नक्षत्र | चंद्रमा का तारा | चंद्रमा की स्थिति |
| योग | सूर्य और चंद्र का जोड़ | दोनों के देशांतर का योग |
| करण | आधी तिथि | तिथि का आधा हिस्सा |
पांचों मिलकर उस दिन की खगोलीय स्थिति का पूरा चित्र देते हैं.
1. तिथि
तिथि चंद्र दिवस है. यह तब बदलती है जब चंद्रमा सूर्य से 12 डिग्री आगे बढ़ जाता है.
एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष की (चंद्रमा बढ़ता है) और 15 कृष्ण पक्ष की (चंद्रमा घटता है).
| क्रम | तिथि | समूह |
|---|---|---|
| 1 | प्रतिपदा | नंदा |
| 2 | द्वितीया | भद्रा |
| 3 | तृतीया | जया |
| 4 | चतुर्थी | रिक्ता |
| 5 | पंचमी | पूर्णा |
| 6 | षष्ठी | नंदा |
| 7 | सप्तमी | भद्रा |
| 8 | अष्टमी | जया |
| 9 | नवमी | रिक्ता |
| 10 | दशमी | पूर्णा |
| 11 | एकादशी | नंदा |
| 12 | द्वादशी | भद्रा |
| 13 | त्रयोदशी | जया |
| 14 | चतुर्दशी | रिक्ता |
| 15 | पूर्णिमा / अमावस्या | पूर्णा |
15 तिथियां पांच समूहों में बंटती हैं, और हर समूह का अपना स्वभाव माना जाता है:
- नंदा (1, 6, 11): आनंद और उत्सव के काम
- भद्रा (2, 7, 12): स्थायी काम, निर्माण
- जया (3, 8, 13): प्रतियोगिता, मुकदमा, विजय के काम
- रिक्ता (4, 9, 14): नए शुभ काम टालें
- पूर्णा (5, 10, 15): पूर्णता के काम, यात्रा
तिथि सूर्योदय के समय जो हो, आमतौर पर पूरे दिन के लिए वही मानी जाती है. लेकिन तिथि दिन में कभी भी बदल सकती है, इसलिए व्रत के लिए सटीक समय देखना ज़रूरी है.
2. वार
यह सबसे आसान अंग है, सप्ताह का दिन. लेकिन एक ज़रूरी बात है.
ज्योतिष में दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक गिना जाता है, रात 12 बजे से नहीं. इसका मतलब यह है कि सोमवार रात 11 बजे भी ज्योतिष की दृष्टि से सोमवार ही चल रहा है, और वह मंगलवार के सूर्योदय पर ही बदलेगा.
हर वार का एक स्वामी ग्रह है: रविवार सूर्य, सोमवार चंद्र, मंगलवार मंगल, बुधवार बुध, गुरुवार गुरु, शुक्रवार शुक्र, शनिवार शनि.
3. नक्षत्र
आकाश को 27 नक्षत्रों में बांटा गया है. चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो, वही उस दिन का नक्षत्र होता है.
चंद्रमा एक नक्षत्र में लगभग एक दिन रहता है. यही अंग विवाह मिलान, नामकरण और दशा की गणना में सबसे ज़्यादा काम आता है.
विस्तार से समझने के लिए नक्षत्र और राशि का संबंध पढ़ें.
4. योग
योग सूर्य और चंद्रमा के देशांतर को जोड़कर निकाला जाता है. कुल 27 योग होते हैं, जैसे विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य.
इनमें कुछ शुभ माने जाते हैं और कुछ अशुभ. मुहूर्त निकालते समय व्यतीपात और वैधृति जैसे योगों से बचा जाता है.
5. करण
करण आधी तिथि होता है. यानी हर तिथि में दो करण आते हैं, और कुल 11 करण होते हैं.
इनमें से 7 चर करण हैं जो बार बार आते हैं, और 4 स्थिर करण हैं जो महीने में एक ही बार आते हैं. विष्टि करण, जिसे भद्रा भी कहते हैं, शुभ कामों के लिए टाला जाता है.
पंचांग रोज़ कैसे इस्तेमाल करें
व्यावहारिक तौर पर ज़्यादातर लोगों को तीन चीज़ें देखनी होती हैं:
1. तिथि, व्रत और त्योहार के लिए 2. राहु काल, ताकि उस समय नया काम शुरू न करें 3. चौघड़िया, शुभ समय चुनने के लिए
बाकी अंग विस्तृत मुहूर्त निकालते समय काम आते हैं, जो आमतौर पर पंडित जी करते हैं.
ध्यान रखें, पंचांग हर शहर के लिए अलग होता है. सूर्योदय और सूर्यास्त का समय जगह के अनुसार बदलता है, और उसी से तिथि, राहु काल और चौघड़िया के समय बदल जाते हैं. इसलिए हमेशा अपने शहर का पंचांग देखें.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पंचांग रोज़ बदलता क्यों है?
क्योंकि यह चंद्रमा और सूर्य की असली स्थिति पर आधारित है, जो हर पल बदलती रहती है.
क्या पंचांग हर शहर के लिए अलग होता है?
हां. सूर्योदय का समय बदलने से तिथि, राहु काल और चौघड़िया सब बदल जाते हैं. आज का पंचांग अपने शहर का देखें.
तिथि और तारीख में क्या फ़र्क है?
तारीख अंग्रेज़ी कैलेंडर की होती है और आधी रात को बदलती है. तिथि चंद्रमा की गति से बनती है और दिन में कभी भी बदल सकती है.
सबसे शुभ तिथि कौन सी है?
काम पर निर्भर करता है. आमतौर पर पूर्णा और नंदा तिथियां शुभ मानी जाती हैं, जबकि रिक्ता तिथियों में नए शुभ काम टाले जाते हैं.
आज का पंचांग देखें
- आज का पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग, करण और राहु काल के साथ
- फ्री जन्म कुंडली बनाएं
- चंद्र राशि और नक्षत्र कैलकुलेटर
- नक्षत्र और राशि का संबंध
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