राहु काल क्या है

दक्षिण भारत में तो कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले सबसे पहले राहु काल देखा जाता है. उत्तर भारत में भी यह चलन बढ़ता जा रहा है.

राहु काल दिन का वह डेढ़ घंटे का हिस्सा है जिसे नए शुभ काम शुरू करने के लिए अशुभ माना जाता है.


हर वार का राहु काल

वारDayदिन का भागसमय (सूर्योदय 6:00 मानकर)
रविवारSunday8वांशाम 4:30 to 6:00
सोमवारMonday2रासुबह 7:30 to 9:00
मंगलवारTuesday7वांदोपहर 3:00 to 4:30
बुधवारWednesday5वांदोपहर 12:00 to 1:30
गुरुवारThursday6ठादोपहर 1:30 to 3:00
शुक्रवारFriday4थासुबह 10:30 to 12:00
शनिवारSaturday3रासुबह 9:00 to 10:30
ऊपर के समय सूर्योदय 6:00 और सूर्यास्त 18:00 मानकर दिए गए हैं. आपके शहर में सूर्योदय अलग होगा, इसलिए असली समय भी थोड़ा अलग होगा. आज का पंचांग में अपने शहर का सही राहु काल देखें.

गणना कैसे होती है

तरीका सीधा है.

1. सूर्योदय से सूर्यास्त तक का कुल समय निकालिए 2. उसे 8 बराबर हिस्सों में बांटिए 3. हर वार के लिए एक तय हिस्सा राहु काल होता है

अगर दिन 12 घंटे का है तो हर हिस्सा 1 घंटा 30 मिनट का होगा. अगर दिन 13 घंटे का है तो हर हिस्सा लगभग 1 घंटा 37 मिनट का हो जाएगा.

इसीलिए राहु काल का समय सर्दी और गर्मी में अलग होता है, और शहर बदलने पर भी बदल जाता है.

एक बात ध्यान देने लायक है: रविवार को पहला नहीं, आठवां हिस्सा राहु काल होता है. क्रम याद रखने का एक तरीका यह है कि सोमवार से शुरू करके 2, 7, 5, 6, 4, 3, 8 का क्रम चलता है.


राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए

परंपरा में इन कामों को टाला जाता है:

  • नया व्यापार या काम शुरू करना
  • विवाह या सगाई का मुहूर्त
  • गृह प्रवेश
  • नई गाड़ी या संपत्ति खरीदना
  • लंबी यात्रा शुरू करना
  • कोई महत्वपूर्ण समझौता या हस्ताक्षर

और क्या करना ठीक है

यहां एक बात साफ़ कर देना ज़रूरी है, क्योंकि इसे लेकर काफ़ी भ्रम है.

राहु काल में पहले से चल रहे काम रोकने की ज़रूरत नहीं है. नियम नई शुरुआत पर लागू होता है, निरंतरता पर नहीं. अगर आप दफ़्तर में हैं तो काम करते रहिए. अगर यात्रा पहले से चल रही है तो चलती रहेगी.

इसके अलावा:

  • रोज़ के काम, पढ़ाई, नौकरी सब सामान्य रूप से चलते हैं
  • पूजा, जप और ध्यान इस दौरान भी किए जा सकते हैं
  • कुछ परंपराओं में तो राहु से जुड़ी साधना के लिए यही समय उपयुक्त माना जाता है
  • आपातकालीन और चिकित्सा संबंधी काम कभी नहीं टालने चाहिए
ईमानदारी से कहें तो राहु काल एक परंपरागत सावधानी है. इसे इतना बड़ा मत बनाइए कि ज़रूरी काम रुक जाएं. अगर किसी दिन राहु काल में ही कोई काम करना पड़ जाए तो उससे कुछ बिगड़ता नहीं.

गुलिक काल और यमगंड

राहु काल की तरह दिन के आठ हिस्सों में दो और अवधि गिनी जाती हैं:

  • गुलिक काल: इसे शुभ माना जाता है, शनि के पुत्र गुलिक से जुड़ा
  • यमगंड: इसे अशुभ माना जाता है

तीनों की गणना एक ही तरीके से होती है, बस हर वार के लिए हिस्सा अलग होता है. आम तौर पर लोग सिर्फ़ राहु काल देखते हैं.


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या रोज़ राहु काल आता है?

हां, हर दिन डेढ़ घंटे के आसपास. सिर्फ़ समय बदलता रहता है.

राहु काल में यात्रा कर सकते हैं?

नई यात्रा शुरू करना टाला जाता है. पहले से चल रही यात्रा जारी रखने में कोई दिक्कत नहीं.

क्या राहु काल हर शहर में एक ही समय होता है?

नहीं. यह सूर्योदय पर निर्भर है, इसलिए हर शहर में अलग होता है. अपने शहर का पंचांग देखें.

सबसे लंबा राहु काल कब होता है?

गर्मियों में, जब दिन लंबा होता है. तब आठवां हिस्सा भी बड़ा हो जाता है.


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